Sunday , 20 May 2018
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HIV AIDS से पीड़ित से भेदभाव करने पर होगी 3 साल की जेल.


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एचआईवी एड्स के मरीजों के साथ भेदभाव करना और उन्हे अधिकारों से वंचित रखना महंगा पड़ सकता है. सरकार इसके लिए नया कानून बनाने जा रही है. इसमें एचआईवी संक्रमितों के साथ भेदभाव करने वाले को 3 महीने से लेकर 2 साल तक की सजा का प्रावधान होगा साथ ही आरोपी पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी हो सकता है.

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देश में करीब 21 लाख एचआईवी रोगी होने का अनुमान है, जिनमें से करीब 10 लाख बाकायदा उपचार करा रहे हैं. एचआईवी संक्रमण का पता लगने पर इन लोगों के साथ समाज, कार्यस्थल और रोजगार में भेदभाव होता है. इसे दूरे करने के लिए यह विधेयक लाया जा रहा है. काफी समय से यह विधेयक तैयार किया जा रहा था. अब संसदीय समिति की सिफारिशों को शामिल करते हुए इसे कैबिनेट ने मंजूरी दी है.

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा है कि विधेयक के प्रावधानों के अनुसार किसी मरीज को एड्स होने की वजह से किसी भी अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकेगा. चाहे वह रोजगार हो, बीमा हो या अस्पताल में इलाज. मरीजों को इलाज भी उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी होगी. साथ ही भेदभाव करने वालों के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए हर राज्य में लोकपाल नियुक्त किया जाएगा. शिकायतों के निपटारे के लिए समय सीमा तय की जाएगी.

इस विधेयक में एचआईवी संक्रमित लोगों और उनके साथ रह रहे लोगों के खिलाफ नफरत फैलाने की वकालत करने या उनसे संबंधित सूचना प्रकाशित करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. यह विधेयक नाबालिगों के लिए संरक्षण भी मुहैया कराता है. बारह से 18 साल तक का ऐसा कोई भी व्यक्ति, जिसमें एचआईवी या एड्स से पीड़ित परिवार के मामलों का प्रबंधन करने और उन्हें समझने के लिए पर्याप्त परिपक्वता है, वह 18 वर्ष से कम आयु के अपने अन्य भाई या बहन के संरक्षक की भूमिका निभा सकता है. यह प्रावधान शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले, बैंक खातों के संचालन, संपत्ति के प्रबंधन, देखभाल एवं उपचार संबंधी मामलों में लागू होगा.

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