Sunday , 25 February 2018
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हे बापू ! तेरे देश में- समीर निगम


अच्छा हुआ जो बापू आज ज़िंदा नहीं अगर होते तो आज के दौर में उन्हें बार-बार मरना पड़ता ।

क्योंकि जो मुल्क देश की बेटियों से नज़र चुरा ले वो अपना मुकम्मल जहाँ नहीं बना सकता,जी हां सही पढ़ रहे है आप। आज हम आपको जो बताने वाले हैं वो आपको जानना होगा क्योंकि ये, उस आजाद भारत का एक कड़वा सच है जहां बेटियां आज भी समाज के साए में पल रहे दरिंदों की हवस का शिकार बन रही हैं, कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और दिल्ली से लखनऊ तक, दरिंदगी के सैकड़ों किस्से कागजों के पन्नों में रोज दर्ज हो रहे हैं।

Rape Cartoons (1)
फोटो साभार- @Latuff2012

आज का समाज सदमे हैं, मां-बाप का दम इसलिए घुट रहा है, ना जाने कब, कौन इंसानी भेड़िया बेटियों को अपनी हवस का शिकार बना ले, कानून अंधा होता है इस बात को साबित करना बच्चों का खेल ही है, क्योंकि अपराधी बेटियों पर अत्याचार की सीमा लांघने के बाद, कानून को बौना साबित कर बड़ी ही आसानी से कानूनी सिकंजों से मुक्त हो जाते हैं और फिर शुरू होता है डर का सिलसिला, जो पुलिस और सिस्टम को कौंधे मुंह गिराकर, समाज को घुट-घुट कर जीने पे मजबूर कर देता है।

 

Rape Cartoons (1)
फोटो साभार- @Mangal Bibhuti

प्रश्न चिन्ह है देश की कानून व्यवस्था पर, प्रश्न चिन्ह है शासन और सत्ता पर, जो बेटियों की आबरू की रक्षा तक नहीं कर पातीं, हर घटना के बाद कड़ी निंदा होती है, मानो ऐसा लगता है जैसे कड़ी निंदा रूपी इस ब्रह्म रूपी शब्द को सुनने के लिए ही आपने और हमने इन नेताओं को अपनी सरकार में चुन लिया है।

 

Rape Cartoons (2)
फोटो साभार-@Kureel

सुनो सरकार अगर बेटियों की रक्षा करना तुम्हारे बस में नहीं तो हथियार डाल दो, अपने सिस्टम को नकारा घोषित कर दो और खुद को लाचार, समाज को ही समाज की रक्षा की जिम्मेदारी सौंप दो, फिर देखना इन अपराधियों का हश्र, अगर हिम्मत नहीं हैं, तो बेटियों की सुरक्षा के लिए कोई ऐसा सख्त कानून बनाओ की अपराधियों की दस पुस्ते भी अपराध करने से पहले 10 बार सोंचें।

Sameer nigam photo
समीर निगम, पत्रकार, लखनऊ

(इस लेख में लेखक के अपने निजी विचार हैं)

 

 

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