Sunday , 20 May 2018
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क्यों मनाई जाती है नागपंचमी? जानिए पांच बड़ी कहानियां।


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आज नाग पंचमी का त्योहार पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। हर साल श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नाग पंचमी का त्योहार श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है और उन्हें दूध पिलाया जाता है। कहा जाता है कि आज के दिन यदि नाग देवता के दर्शन हो जाए तो पूजा सफल हो जाती है। लेकिन नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है, इससे जुड़ी क्या कहानियां है। ये बहुत कम लोगों को मालूम है। आज हम आपको नागपंचमी से जुड़ी पांच बड़ी कथाएं बताएंगे।

पहली कहानी-

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एक समय की बात है, कालिया नाग का निवास यमुना नदी में होने से नदी का पानी काले रंग का होने लगा था। भयानक विषधर कालिया नाग के विष के कारण यमुना नदी विषाक्त हो चली थी। जब कालिया नाग के इस कृत्य की जानकारी भगवान श्री कृष्ण तक पहुंची तब उन्होंने कालिया नाग के साथ युद्ध करते हुए उसे यमुना को छोड़ने पर विवश कर दिया और पाताल लोक भेज दिया। इस तरह भगवान श्री कृष्ण ने भयंकर विषधर के भय से आम लोगों को मुक्त किया। कहते हैं इस दिन श्रावण मास की पंचमी तिथि थी, बृज के लोगों ने इस दिन नाग देवता की पूजा की। तब से आज तक श्रावण मास की पंचमी को नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है।

दूसरी कहानी-

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एक समय नागों की माता कद्रु ने सभी प्रकार के सर्पों को श्राप दिया कि भविष्य में तुम सभी राजा जनमेजय के आयोजित यज्ञ के हवन कुण्ड में जलकर भस्म हो जाओगे। नाग माता के ऐसे श्राप को सुनकर सारे सर्प ब्रह्मा जी की शरण में पहुंचे और श्राप मुक्त होने का उपाय पूछने लगे। ब्रह्माजी ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा कि यायावर वंश में उत्पन्न ऋषि जरत्कारु तुम्हारे बहनोई के रूप में प्राप्त होंगे। इसीलिए इस तिथि से नागपंचमी पर्व का आरंभ माना जाता है।

तीसरी कहानी-

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किसी राज्य में एक किसान परिवार रहता था। किसान के दो पुत्र व एक पुत्री थी। एक दिन हल जोतते समय हल से नाग के तीन बच्चे कुचल कर मर गए। बच्चों की मौत पर नागिन पहले तो विलाप करती रही, फिर उसने अपनी संतान के हत्यारे से बदला लेने का संकल्प किया। अधेरी रात में नागिन ने किसान, उसकी पत्नी व दोनों लड़कों को डस लिया। अगले दिन सुबह किसान की पुत्री को डसने के लिए नागिन फिर चली तो किसान की बेटी ने उसके सामने दूध का भरा कटोरा रख दिया और हाथ जोड़ कर क्षमा मांगने लगी। नागिन ने प्रसन्न होकर उसके माता-पिता व दोनों भाइयों को पुनः जीवित कर दिया। उस दिन श्रावण की शुक्ल पंचमी थी। तब से आज तक नागों के कोप से बचने के लिए श्रावण की शुक्ल पंचमी को नाग और नागिन की पूजा की जाती है।

चौथी कहानी-

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एक राजा के सात पुत्र थे, उन सबके विवाह हो चुके थे। उनमें से छह पुत्रों के संतान भी हो चुकी थी। सबसे छोटे पुत्र के लंबे समय तक कोई संतान नहीं हुई, उसकी बहू को जिठानियां बांझ कहकर ताने देने लगीं। इससे व्याकुल होकर वह बेचारी हमेशा रोती रहती। अचानक एक रात को श्रावन मास की चौथ में उसे स्वप्न में पांच नाग दिखाई दिए, उनमें से एक ने कहा- ‘अरी पुत्री। कल पंचमी है, तू अगर हमारा पूजन करें तो तुझे पुत्र रत्न की प्राप्ति हो सकती है। ये सुनकर वो उठ बैठी और अपने पति को ये बात बताई। पति ने कहा उसे ऐसा करना चाहिए। दूसरे दिन सुबह उसने पांच नाग की आकृति बनाकर उसका पूजन किया। ठीक नौ महीने बाद महिला को सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई, तब से आज तक महिलाएं पुत्र की प्राप्ति और उसकी आयु के लिए नाग पंचमी मनातीं हैं। और अपने घरों में सांप की आकृति बनाकर पूजा करतीं है।

पांचवी कहानी-

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पुरानी बात है। एक सेठ के सात बेटे थे। सातों की शादी हो चुकी थी। सबसे छोटे बेटे की पत्नी काफी सुंदर, सुशील और ज्ञानी थी, लेकिन उसका कोई भाई नहीं था।

एक दिन बड़ी बहु के साथ सभी बहुएं घर लीपने के लिए मिट्टी लाने गईं। मिट्टी निकालते समय वहां एक नाग नजर आया, जिसे देखते ही बड़ी बहु हाथ में मौजूद खुरपी से उसपर वार करने लगी। यह देख छोटी बहु चिल्ला पड़ी और बड़ी बहु से विनती कर बोली कि इसका अपराध क्या है? इसे मत मारो। अगले दिन छोटी बहू को अचानक याद आया कि उसने नाग से वहीं रुकने को कहा था। वह दौड़ती हुई वहां पहुंची तो देखी कि नाग वहीं बैठा है। वह बोली- भैया, मुझे माफ करना। मैं भूल गई थी कि आपको मैंने यहां रुकने के लिए कहा था। नाग ने कहा, अब आज से तुम मेरी बहन हुई तो जो हुआ उसके लिए मैं तुम्हें माफ करता हूं। अब तुम्हें जो चाहिए वह मुझसे मांग लो। छोटी बहू ने कहा कि मुझे कुछ नहीं चाहिए। आप मेरे भाई बन गए, मुझे सब कुछ मिल गया। कुछ दिन बीत जाने के बाद वही नाग मनुष्य का रूप लेकर बहू के घर आया और परिवार वालों से कहा कि मेरी बहन को मेरे साथ कुछ समय के लिए भेज दें। घरवालों ने कहा कि इसका तो कोई भाई ही नहीं था तो तू कौन हैं? उसने कहा कि मैं दूर का भाई लगता हूं और जब छोटा था तभी मैं गांव से बाहर चला गया था। घरवालों को यकीन हो जाने के बाद  अपनी बहन को लेकर वह अपने घर चला गया और कुछ दिन के बाद अपनी बहन को ढेर सारा धन, सम्पत्ति, सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात देकर विदा किया। इतना सारा धन देख छोटी बहू के ससुराल वाले हैरान थे। सांप ने अपनी बहन को हीरे और मणि से जड़ा एक हार लाकर दिया था। उस हार के बारे में सुन नगर की रानी राजा से इसे मंगाने का जिद कर बैठी। यह हार मंत्री को कहकर मंगा तो लिया गया, लेकिन जैसे ही रानी ने इसे पहना तो वह हार सांप बन गया। राजा ने इसे छोटी बहू का जादू समझकर उसे हवेली बुलवाया। जैसे ही यह हार छोटी बहू ने अपने गले में डाला यह फिर हीरे और मणियों का बन गया। राजा ने सचाई जानकर उसे बहुत सारा धन-संपत्ति देकर विदा कर दिया। घर में छोटू बहू को सोने-चांदी से लदा देख बड़ी बहुओं को ईर्ष्या होने लगी तो वे उस पर तरह-तरह के लांछन लगाने लगीं और उसके पति से पूछने को कहा कि वह इतना धन-संपत्ति कहां से लाई है? पत्नी, पति को सच बता ही रही थी कि सांप उसी समय प्रकट हुआ और उसने कहा कि जो भी मेरी बहन के चरित्र पर शक करेगा उसे में डस लूंगा। छोटी बहू के पति ने माफी मांगी और सर्प देवता का खूब आदर-सत्कार किया। उसी दिन से यह नागपंचमी का त्योहार मनाया जाने लगा। कहते हैं महिलाएं सांप को भाई मानकर नागदेवता की पूजा करती हैं।

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