Sunday , 20 May 2018
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नाग पंचमी के दिन क्यों पीटी जाती हैं गुड़िया? जानिए क्यों मनाते हैं गुड़िया त्योहार?


gudiya fest

नागपंचमी के त्योहार को कई शहरों में गुड़िया के रुप में मनाते है। खास कर ईस्ट यूपी और एमपी के कुछ जिलों में… आइये जानते है कि गुड़िया त्योहार का क्या महत्व है। इससे जुड़ी दो कहानियां आज हम आपको बताएंगे।

गुड़िया त्योहार की पहली कहानी-

gudiya trohar

तक्षक नाग के बारे में आपने कई धार्मिक पुस्तकों में पढ़ा होगा।  माना जाता है कि तक्षक नाग काफी जहरीला था। इसमें इतनी शक्ति थी कि अपने विष से हरे-भरे वृक्ष को भी सूखा सकता था। एक बार महाराज परीक्षित को एक ऋषि ने शाप दे दिया कि तक्षक तुम्हें डसेगा जिससे तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी। ऋषि के श्राप से तक्षक ने नियत समय पर परीक्षित को डस लिया। इससे परीक्षित की मृत्यु हो गयी। धीरे-धीरे समय बीतता गया और तक्षक की चौथी पीढी में कन्या का विवाह राजा परीक्षित की चौथी पीढी में हुआ। उस कन्या ने ससुराल में एक महिला को यह रहस्य बताकर उससे इस बारे में किसी को भी नहीं बताने के लिए कहा। कहते हैं कि औरतों के पेट में कोई बात हजम नहीं होती और उस महिला ने दूसरी महिला को यह बात बता दी और उसने भी उससे यह राज किसी से नहीं बताने के लिए कहा। लेकिन धीरे-धीरे यह बात पूरे नगर में फैल गई। तक्षक के तत्कालीन राजा ने इस रहस्य को उजागर करने पर नगर की सभी लड़कियों को चौराहे पर इकट्ठा करके कोड़ों से पिटवा कर मरवा दिया। वह इस बात से क्रुद्ध हो गया था कि औरतों के पेट में कोई बात नहीं पचती है। तभी से नागपंचमी पर गुड़िया को पीटने की परम्परा है।

दूसरी कहानी-

guddiya

वहीं एक दूसरी कथा के मुताबिक, किसी नगर में एक भाई अपनी बहन के साथ रहता था। दोनों भाई बहन एक दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। भाई, भगवान भोलेनाथ और मां काली का भक्त था। वह प्रतिदिन भगवान भोलेनाथ के मंदिर जाता था जहाँ उसे एक नागदेवता के दर्शन होते थे। वह लड़का रोजाना उस नाग को दूध पिलाने लगा। धीरे-धीरे दोनों में प्रेम बढ़ने लगा। लड़के को देखते ही सांप अपनी मणि छोड़कर उसके पैरों में लिपट जाता था। एक बार सावन का महीना था। बहन, भाई के साथ सज धजकर मंदिर जाने के लिए तैयार हुई। नये गेहूं और चने की मीठी खीर, फल, फूल को एक टोकरी में लेकर भाई संग मंदिर गयी। वहां रोज की तरह सांप अपनी मणि छोड़कर भाई के पैरों मे लिपट गया। बहन को लगा कि सांप भाई को डस रहा है। इस पर उसने वह टोकरी सांप पर दे मारी और उसे पीट-पीटकर मार डाला। भाई ने जब अपनी बहन को पूरी बात बताई तो वह रोने लगी और पश्चाताप करने लगी। लोगों ने कहा कि सांप देवता का रूप होते हैं इसलिए बहन को दंड और पूजा जरूरी है। लेकिन प्यारी सी बहन को दंड़ कौन देगा। बहन ने तो भाई की जान बचाने के लिए सांप को मारा है। इसलिए भाई ने बहन के रूप में एक गुड़िया बनाई और उसे डंडों से पीट-पीटकर दंड़ दिया। उस दिन से आज तक बहन यानी की गुड़िया को हर काल में दंड भुगतना पड़ता है। उस दिन से नागपंचमी के पर्व के साथ गुड़िया का पर्व भी मनाया जाने लगा।

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