Sunday , 25 February 2018
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नागपंचमी विशेषः साल में एक बार ही खुलते हैं इस मंदिर के कपाट।


IMG-20150822-WA0004आज जहां पूरा देश नाग पंचमी मना रहा है, वहीं हम आपको बताएँगे इस दिन के विशेष महत्व की.

पूरे भारत देश में एक ऐसा मंदिर है जिसके कपाट साल में एक बार ही खोले जाते है और वह है, उज्जैल के महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागपंचमी के मौके पर रात 12 बजे से दर्शन करने का सिलसिला शुरू होता है और महज 24 घंटे के लिए खुले रहने के बाद दूसरे दिन रात को एक बार फिर मंदिर के कपाट साल भर के लिए बंद हो जाएंगे.

दरअसल, महाकालेश्वर की प्रतिमा दक्षिणमुखी है. तांत्रिक परम्परा में प्रसिध्द दक्षिण मुखी पूजा का महत्व बारह ज्योतिर्लिंगों में केवल महाकालेश्वर को ही प्राप्त है. ओंकारेश्वर में मंदिर की ऊपरी पीठ पर महाकाल मूर्ति की तरह इस तरह मंदिर में भी ओंकारेश्वर शिव की प्रतिष्ठा है. तीसरे खण्ड में नागचंद्रेश्वर मंदिर है, जिसमें दर्शन केवल नागपंचमी को होते है.

रात 12 बजे मंदिर के पट खुलते ही सबसे पहले महानिर्वाणी अखाड़े के महंत प्रकाशपुरीजी पूजन करते है. इस विधिवत पूजन के बाद ही श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला शुरू होता है. नागपंचमी के दिन दोपहर 12 बजे प्रशासन की तरह से शासकीय पूजन भी होता है.

क्या है खास…

nagchandreshwar-temple-ujjainनागचन्द्रेश्वर मंदिर में प्रतिमा के आसन में शिव-पार्वती की सुन्दर प्रतिमा स्थित है जिसमें छत्र के रुप में नाग का फन फैला हुआ है. सातवीं शताब्दी की यह दुर्लभ प्रतिमा नेपाल से लाकर महाकाल मंदिर के शीर्ष पर स्थापित की गई थी. भगवान यहां लिंग रूप में भी स्थापित हैं. ये मंदिर जमीन से लगभग 60 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं. इस मंदिर में पहुचने के लियें प्राचीन में इसका रास्ता संकरा और अंधेरा वाला था. पहले एक समय में एक ही व्यक्ति चढ़ सकता था. लेकिन कई साल पहले मंदिर में दर्शनार्थियो की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति और जिला प्रशासन ने लोहे की सीढियां का रास्ता अलग से बना दिया है.

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