Sunday , 20 May 2018
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‘दलितों पर अत्याचार’ और ‘श्रीराम ना कहने की सज़ा’ वाला वीडियो गलत। जानिए क्या है सच?


मानवता कितनी शर्मसार हो गई है। इसका अंदाजा इन तस्वीरों से लगाया जा सकता है।

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ये तस्वीरें ऐसी है, जिन्हे साफ-साफ नहीं दिखाया जा सकता है। लेकिन आप इन तस्वीरों को देखकर समझ जाएंगे कि इसमें दो लोगों की कुछ लोग पिटाई कर रहे है। जिन दो लोगों की पिटाई हो रही है, वो नग्न अवस्था में है। और कुछ लोग ढ़ोल नगाड़े बजाकर जश्न मना रहे हैं।

देखिए रिपोर्ट-

सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियों कई दिनों से घूम रहा है। इस वायरल वीडियों में अलग-अलग एजेंडे के हिसाब से दावा किया जा रहा है। कोई इसे जाति से जोड़ रहा है तो कोई धर्म से। पहला दावा दलितों पर हो रहे अत्याचारों से जोड़ रहा है, तो दूसरा श्री राम ना कहने पर दी गई सजा को लेकर किया जा रहा है। लेकिन इस वीडयों की हकीकत क्या है, और ये वीडियो कहां का है? ये कोई नहीं जानता। तमाम पत्रकार, खबरियां चैनल और पोर्टल इस वीडियों में अपने विचारों को मढ़ कर लोगों को गलत जानकारी दे रहे है। युवा पत्रकार ने इस वीडियों की पड़ताल के बाद इसकी हकीकत हासिल की। इस वीडियों की सच्चाई जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। लेकिन इस वीडियों की हकीकत ना तो दलितों पर हो रहे अत्याचारों की है, और ना ही श्रीराम ना कहने वालों को दी गई सज़ा… ये वीडियों राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कलिंचरा थाना क्षेत्र के शंभूपुरा गांव का है और ये घटना अप्रैल 2016 की है। जहां संभूपुरा गांव में एक प्रेमी-प्रेमिका ने भागकर शादी कर ली थी। गांववालों को इससे ऐतराज था, पंचायत के फरमान पर पुलिस को बिना सूचना दिए प्रेमी-प्रेमिका को ढूंढने का काम शुरू किया गया। कुछ दिन बाद दोनों गुजरात में मिले। जहां पंचायत के आदेश के बाद प्रेमी-प्रेमिका को पूरे गांव में नग्न अवस्था में ढ़ोल नगाड़ों के साथ घुमाया गया और उनकी डंडों से पिटाई की गई। इस घटना के साक्षी बने कई लोगों ने इसका वीडियों बना लिया, जिसके बाद इस वीडियो पर अलग-अलग हेडलाइन देकर वायरल किया गया। पुलिस ने इस घटना में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। मामला शांत होने के  एक साल बाद भी लोग सोशल मीडिया पर इस वीडियो को वायरल कर रहें है।

अब सवाल है सोशल मीडिया पर बिना जानकारी के किसी के भी वीडियों को शेयर कर देने वालों और उन खबरियां चैनल और पोर्टल पर जो अपनी विचारधारा किसी भी वीडियों और घटना पर फिट कर भोली-भाली जनता को धर्म और जाति के नाम पर गुमराह करते है।

युवा पत्रकार इस वीडियों में हुई घटना की घोर निंदा करता है और आपसे अपील करता है कि सामाजिक सौहार्द के लिए सोशल मीडिया पर बिना जांचे-परखे कोई भी वीडियो और फोटो शेयर ना करें।

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