Friday , 25 May 2018
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मैं पत्रकार हूं… मुझे भी गोली मार दोः रोमल भावसार


तुमने वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश को मार दिया… 24 घंटे बाद तुमने बिहार के एक पत्रकार को भी मार दिया… पता नहीं अब तक तुम कितने पत्रकारों को मार चुके हो और पता नहीं कितने और पत्रकारों को मारोगे… मैं भी पत्रकार हूं… एक गोली मुझे भी मार दो… क्योंकि मैं सच लिखना नहीं छोड़ सकता…

618xNx631913_thump.jpg.pagespeed.ic.m8Tq04QXa5समस्या क्या है पता है… तुम आईने में सच को देखकर खुद को नहीं बदल सकते… तो आईना ही तोड़ दिया… चेहरा पसंद नहीं आया तो आइने से खफा हो गए… ये वो स्याह सच है… जो आज हर पत्रकार महसूस करता है… ये वो दर्द है… जिसकी इंतहा नहीं है… ये दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में हो रहा है… लोकतंत्र के उस चौथे स्तंभ पर हो रहा है… जो आपका-हमारा पूरे समाज का आइना है… आपके राज का… आपके देश का… हर उस दुखती रग का… जो इंसाफ चाहता है… इंसाफ के लिए आवाज चाहता है… मगर उसे बदले में क्या मिला… रंज… रंजिश… रक्त और गोली… गलती मीडिया हाउसेस की भी हैं… रीजनल मीडिया मुख्यमंत्रियों की गुलाम हो चुकी है… जंनसंपर्क के विज्ञापन के आगे चैनल के बड़े पदों पर बैठे पत्रकार सत्ता के गुलाम हो गए हैं…

imagesबॉस की चापलूसी करने वाला अच्छा पत्रकार और अच्छा लिखने और काम करने वाले की कोई कीमत नहीं… राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी क्या खूब थी… बीजेपी बोली जब संघ के लोग मर रहे थे तो कांग्रेस क्यों चुप थे? मतलब मेरी मौत बड़ी या तेरी मौत… राहुल गांधी ने कहा कि ये लोकतंत्र की हत्या है… राहुल बाबा… कर्नाटक में सरकार आपकी है… सवाल किससे कर रहे हो और जवाब किससे मांग रहे हो… अपने मुख्यमंत्री से पूछे कानून क्या राम भरोसे है… सबसे बड़ी बात है कि पत्रकार मर रहे हैं और दिल्ली में खुद को पत्रकारिता जगत के मठाधीश कहने वाले लोग केंद्रीय मंत्रियों के साथ नाश्ता कर रहे हैं… सवाल यही है पत्रकारिता की रक्षा कौन करेगा? लोकतंत्र है… और रहेगा… हम भी रहेंगे… हमसे मीडिया भी रहेगा… क्योंकि सच का कभी कत्ल नहीं किया जा सकता है… हम आईना है, आपको सच दिखाते रहेंगे, पसंद नहीं आए तो आप आईना तोड़ देना… क्योंकि हम तो नहीं बदेंले… हम तो आईना हैं… दाग दिखायेंगे चेहरे के, कहते हैं लोग की आईना सच बोलता है वही दिखाता है जो होता है क्योंकि आईना झूठा नहीं होता…

romel
रोमल भावसार, वरिष्ठ पत्रकार

‘रोमल का राग’ ब्लॉग से…

(इस लेख में लेखक के अपने निजी विचार हैं)

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