Friday , 25 May 2018
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प्रद्युम्न इस समाज को माफ कर देना- रोमल भावसार


प्रद्युम्न आज तुम हमारे बीच नहीं हो… पर शिक्षा के मंदिर में तुम्हारे साथ जो घिनौनी हरकत करने की कोशिश की गई हम सब जानते हैं… हम उस दर्द को महसूस कर सकते हैं जो तुमने सहन किया होगा इस दुनिया को छोड़ने से पहले… साथ ही उस दर्द को अब तक महसूस कर रहे है जो तुम्हारे माता-पिता को मिला है…

pradyuman-thakur_1504951120तुम्हारा वो पत्र भी हमने देखा जो बताता है कि तुम अपनी मां के कितने लाड़ले थे… यकीन मानना ये ब्लॉग लिखते लिखते भी आंखें नम होने लगी है… एक हंसता सा, कोमल सा, घर का चिराग समाज की सोच की भेट चढ़ गया… प्रदर्शन होंगे… कैंडल मार्च भी होंगे पर तुम्हारी क्लास की वो खाली बेंच साथियों के दिल और दिमाग को हमेशा कचोटती रहेगी… तुम्हारी प्यारी सी बहन की राखी हमेशा तुम्हारा रास्ता देखती रहेगी… प्रद्युम्न हमे इस समाज पर शर्म आती है जहां लाखों रुपए फीस देकर भी माता-पिता अपने बच्चों के सुरक्षित नहीं रख पाए… शिक्षा के मंदिर में शैतान ने प्यारे से बच्चे की जिंदगी छीन ली… लोगों की सोच है जितना बड़ा स्कूल… जितनी ज्यादा फीस समाज में उतना ही बड़ा स्टेटस… सवाल प्रद्युम्न सिर्फ तुम्हारा नहीं है… देशभर में पता नहीं कितने रियान स्कूल होंगे… पता नहीं कितने प्रद्युम्न होंगे…

pradyumna-letterशिक्षा के मंदिर शोरूम बन गए हैं जनाब… स्कूल एक धंधा है पैसा कमाने का… क्या फर्क पड़ता है आपने लाखों रुपए फीस औऱ डोनेशन दिया… पर स्कूल रुपी दुकान चला रहे व्यापारी ने मासूम बच्चों से प्रद्युम्न का खून साफ कराया… अगर इतना पैसा देकर भी आपका बच्चा स्कूल के टायलेट में सुरक्षित नहीं है तो किस बात का है समाज का ये स्टेटस… प्रिसिंपल को सस्पेंड कर दिया गया पर स्कूल चलाने वाला वो बिजनसमैन अब भी सब मैनेज करने में लगा है… प्रद्युम्न माफ करना हो सकता है नोटों की गड्डी से वो तुम्हारी मौत की सच्चाई को दबा दे… समाज को माफ करना जो सोचता है कि महंगा स्कूल ज्यादा अच्छा है… इससे कोई फर्क नहीं पड़ता उसी महंगे स्कूल ने तुम्हे पूरी जिंदगी जीने का हक नहीं दिया… हो सके तो समाज की इस सोच को माफ कर देना… मेरे लिए तो सरकारी स्कूल का वो टपरा ही अच्छा है… क्लास थोड़ी गंदी जरूर होती थी… पर सोच बहुत अच्छी… पढ़ाई उससे भी अच्छी… पर स्टेटस के हिसाब से बस फीस कम थी…

‘रोमल का राग’ ब्लॉग से…

(इस लेख में लेखक के निजी विचार हैं)

romel
रोमल भावसार, वरिष्ठ पत्रकार

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