Sunday , 25 February 2018
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दशहरा पर राम नहीं, देश में इन जगहों पर होती है रावण की पूजा…


आज देश में दशहरा धूमधाम से मनाया जा रहा है. बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सबको इंतजार है रावण दहन को देखने का. हमारी परंपरा के अनुसार ये वर्षों से चला आया है, जब इस दिन हर कोई उत्साहित होता है रावण दहन को. रावण दहन के साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत के साथ ही जय श्री राम के जयकारे लगते है और देशभर में रामजी की पूजा होती है. लेकिन हमारे देश में ही कई ऐसी जगह है जहां भगवान राम की नहीं रावण की पूजा होती है.

देश में रावण के कई मंदिर है, जहां अलग-अलग मान्यताओं के आधार पर रावण की पूजा की जाती है.

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विदिशा (मध्य प्रदेश)

मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में एक गांव है, जहां रावण का मंदिर बना हुआ है. यहां हर साल रावण की पूजा होती है. वहीं मध्यप्रदेश के ही मंदसौर जिले में भी रावण की पूजा की जाती है. मंदसौर के खानपुरा क्षेत्र में रावण रूण्डी नाम की जगह पर रावण की विशाल मूर्ति है. कथाओं के अनुसार, रावण दशपुर (मंदसौर) का दामाद था. रावण की धर्मपत्नी मंदोदरी मंदसौर की निवासी थीं. मंदोदरी के कारण ही दशपुर का नाम मंदसौर माना जाता है.

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कोलार (कर्नाटक)
कर्नाटक के कोलार जिले में लोग फसल महोत्सव के दौरान रावण की पूजा करते हैं और इस मौके पर जुलूस भी निकालते है. ये लोग रावण की पूजा इसलिए करते हैं क्योंकि वह भगवान शिव का परम भक्त था. लंकेश्वर महोत्सव में भगवान शिव के साथ रावण की प्रतिमा भी जुलूस में निकाली जाती है. इसी राज्य के मंडया जिले के मालवल्ली तहसील में भी रावण का एक मंदिर है, जहां हर साल रावण की पूजा होती है.

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कानपुर (उत्तर प्रदेश)
उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध शहर कानपुर में रावण एक बहुत ही प्रसिद्ध दशानन मंदिर है. कानपुर के शिवाला इलाके के बने इस मंदिर में शक्ति के प्रतीक के रूप में रावण की पूजा होती है और श्रद्धालु तेल के दिए जलाकर रावण से अपनी मन्नतें पूरी करने की प्रार्थना करते हैं. कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1890 किया गया था. रावण के इस मंदिर को साल में केवल एक बार दशहरे के दिन ही खोला जाता हैं. परंपरा के अनुसार, दशहरे पर सुबह मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं. फिर रावण की प्रतिमा का साज श्रृंगार कर, आरती की जाती है. दशहरे पर रावण के दर्शन के लिए इस मंदिर में भक्तों की भीड़ लगती है और शाम को मंदिर के दरवाजे एक साल के लिए बंद कर दिए जाते हैं.

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जोधपुर (राजस्थान)
राजस्थान के जोधपुर जिले के मन्दोदरी नाम के क्षेत्र को रावण और मन्दोदरी का विवाह स्थल माना जाता है. जोधपुर में रावण और मन्दोदरी के विवाह स्थल पर आज भी रावण की चवरी नामक एक छतरी मौजूद है. शहर के चांदपोल क्षेत्र में रावण का मंदिर बनाया गया है. जहां दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है.

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कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में शिवनगरी के नाम से मशहूर बैजनाथ कस्बा है. यहां के लोग रावण का पुतला जलाना महापाप मानते है. यहां पर रावण की पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि यहां रावण ने कुछ साल बैजनाथ में भगवान शिव की तपस्या कर मोक्ष का वरदान प्राप्त किया था.

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